क्या ...
राजेश जोशी की कविता 'इत्यादि' का इत्यादि हूँ मैं ?
या फिर ..
गोरों के लिए काले पानी वाली तेज़ाबी आँधी हूँ मैं ?
या ..
आज़ादी के नाम पे हुए उस बँटवारे की बर्बादी हूँ मैं ?
या ..
कर्ज़दार विवश आत्महंता किसान की त्रासदी हूँ मैं ?
या ..
आत्महंता किसान के अनाथ परिवार की आधि हूँ मैं ?
क्या ..
राजेश जोशी की कविता 'इत्यादि' का इत्यादि हूँ मैं ?
या फिर ..
भ्रष्टाचारी का ख़ाकी या सज़ायाफ़्ता की खादी हूँ मैं ?
या ..
बढ़ती ज्यामितीय आकार से वतन की आबादी हूँ मैं ?
या ..
विकास की आड़ में कुदरती आपदा की मुनादी हूँ मैं ?
या ..
धर्मनिरपेक्ष होकर भी आरक्षण भोगी जातिवादी हूँ मैं ?
क्या ..
राजेश जोशी की कविता 'इत्यादि' का इत्यादि हूँ मैं ?
या फिर ..
निःसहाय, परवश बलात्कृत की झीनी आपत्ति हूँ मैं ?
या ..
राजा-महाराजाओं के अंतःपुर, हरम की व्युत्पत्ति हूँ मैं ?
या ..
एक प्रेम-निशानी परन्तु समाज की अवैध संतति हूँ मैं ?
या ..
व्यभिचारी नरों की जननी, कोठेवाली की उपाधि हूँ मैं ?
क्या ..
राजेश जोशी की कविता 'इत्यादि' का इत्यादि हूँ मैं ?
या फिर ..
अंधपरंपराओं को रीति-रिवाज मानने का आदी हूँ मैं ?
या ..
पृथ्वी का वर्तमान भर या पूरे ब्रह्माण्ड का आदि हूँ मैं ?
या ..
हूँ जीवन रेखा से बँधा नश्वर शरीर भर या अनादि हूँ मैं ?
या ..
वीर्य-बूँद से भस्म तक का राही, आज मांस-पिंडी हूँ मैं ?
बिहारी था कभी, राज्य बँट जाने से अब झारखंडी हूँ मैं ?
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क्या बात है वाह्ह बेहतरीन अभिव्यक्ति।
ReplyDeleteइत्यादि से इत्यादि तक की विविधताओं से भरी लाज़वाब यात्रा।
सादर।
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नमस्ते,
आपकी लिखी रचना मंगलवार ६ जनवरी २०२६ के लिए साझा की गयी है
पांच लिंकों का आनंद पर...
आप भी सादर आमंत्रित हैं।
सादर
धन्यवाद।
जी ! .. आपको मन से नमन एवं आपका आभार हमारी बतकही को इस मंच तक मौका देने के लिए ...
Deleteकाश ! .. यशोदा जी इसे पढ़ पातीं .. उनको (उनकी शाश्वत आत्मा को) सादर नमन 🙏
बेबाक चिंतन
ReplyDeleteजी ! .. आपको सादर नमन संग हार्दिक आभार आपका ...🙏
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