Tuesday, October 20, 2026

आँखों की एक्सपायरी डेट ! ...

 (1) मोबाइल के सहज-सुलभ उपलब्ध कॉल और व्हाट्सएप्प के रहते हुए, क्यों कोई भी अपनी मन की बातें किसी से कहने के लिए पत्र लिखने और भेजने की परेशानी मोल लेगा भला ! .. तो .. फिर ये लिफ़ाफ़ा ? 

(2) दरअसल तुम मेरी साँसों के थमने की ख़बर मिलने के बाद ही, तुरन्त इस लिफ़ाफ़े को खोल कर पढ़ना और कोई भी कर्मकांडी पारम्परिक संस्कार करने से पहले मेरी लिखी बातों का पालन करना। समझ गए ना ?


(3) "हेलो .. आप सिद्धार्थ ही बोल रहे हैं ना ?"

"हाँ, आप कौन ?"


(4) कुछ मिनटों बाद ही कार ड्राइव करते हुए सिद्धार्थ पुनः नीरा से .. - "हुआ ?"


(5) फिर नीरा से - "सब पैक हो गया ना नीरा ?"

"वैसे तो .. नूपुर के भी सारे सामानों को रख ली हो ना ?"


(6) नूपुर - "हम लोग कहाँ जा रहे हैं पापा ?"


(7) "मम्मी ! .. आप पढ़ कर बतलाओ .. हमें ऐसा करना चाहिए या नहीं ? .. उनके मृत शरीर पर .. कम-से-कम उनके मरने के बाद तो उनका अधिकार है ही ना मम्मी ?"


(8) "तब कहाँ करोगे दाह संस्कार पापा का ? .. दफ़नाने का कोई इरादा तो नहीं है ना ?"


(9) क्योंकि तुमने किसी को जलाया ही नहीं तो फिर .. सूतक किस बात की ? 


(10) अंकल और आँटी एक साथ - "तो ?"


इन सभी उपरोक्त प्रश्नों के उत्तरों के लिए :-


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तो .. फिर देरी किस बात की ? .. बस .. पन्ने पलटते जाइए। पर .. बस यूँ ही .. नहीं, बल्कि सभी रचनाकारों की रचनाएँ भी पढ़ते जाइए और फिर .. 35 No पन्ने से लेकर 51 No पन्ने तक 17 पन्नों की एक चिट्ठीनुमा कहानी पढ़िए - "आँखों की एक्सपायरी डेट ! ..." .. वो भी प्राकृतिक प्राण वायु की तरह .. बिल्कुल निःशुल्क .. जी हाँ .. बिल्कुल निःशुल्क .. "प्रतिज्ञान प्रकाशन" की ओर से .. बस यूँ ही ...