Sunday, February 8, 2026

चूड़ीदार ...


हाल ही में Google पर एक घटना की जानकारी मिली कि केरल के कोल्लम में एक स्कूल हेडमिस्ट्रेस को 'चूड़ीदार' पहनने के कारण स्कूल के मैनेजर के निर्देशानुसार सिक्योरिटी गार्ड ने गेट पर ही रोक दिया। हालांकि पुलिस के आने के बाद उन्हें अन्दर जाने दिया गया और गार्ड को सस्पेंड भी कर दिया गया।


गत वर्ष की एक ख़बर के मुताबिक़ अपने देश में एक राज्य के माननीय मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी, जो एक social worker होने के नाते एक सफ़ाई अभियान में शामिल हुईं थीं। क्योंकि हर वर्ष की तरह ही गत वर्ष भी so called भक्तगण ने गणेश मूर्ति विसर्जन के दौरान Juhu Beach पर गंदगी फैलायी थी, उसी की सफ़ाई के लिए। उस दौरान उनके पहने गए परिधान के लिए भी सभ्यता-संस्कृति के so called पक्षधर लोग सोशल मीडिया पर ऊटपटाँग प्रतिक्रियाएँ दिए जा रहे थे।

कुछ प्रतिक्रियाओं के अनुसार Public Place में तो उन्हें ऐसी पोशाक पहननी ही नहीं चाहिए थी। ऐसी पोशाक उन महानुभावों के लिए राष्ट्रीय सम्मान का सवाल था।

तो फिर यही लोग देश की तमाम महिला Athlete और महिला तैराक के लिए Public Place पर किस तरह की पोशाक पहनने की सलाह देंगे भला ? 



क्योंकि वो सभी महिला Athlete और महिला तैराक लोग तो सार्वजनिक स्थलों पर उन से भी कम कपड़ों में अपने खेलों का प्रदर्शन करती हैं और राष्ट्रीय सम्मान के लिए अनगिनत Medals लेकर भी आती हैं। 

कम पोशाकों के लिए ऐसी छिछोरी प्रतिक्रियाएँ देने वाले ये वही देशभक्तगण और सभ्यता- संस्कृति के so called पक्षधर लोग हैं , जो खैनी और गुटखा मुँह में ठूंस कर Happy Republic Day और Happy Independence Day बोलते हैं। 

या 2 October को Dry Day होने से पहले खरीदे गए बोतलों से National Holiday का लुत्फ़ लेते हुए One Leg with Two Peg के  साथ Happy Birthday Gandhi बोलते हैं।



ये वही लोग हैं, जो महिलाओं को समुद्र में या swimming pool में नहाते हुए या फिर गंगा स्नान करते वक्त उनके गीले परिधानों में उन्हें ताड़ते रहते हैं।




ये वही लोग हैं जो, पूजन स्थल के भीतर नग्न या अर्द्धनग्न, उत्तरीय वस्त्र या लंगोटी वाली मूर्तियों के रहने पर भी, बाहर से अन्दर जाने वाले so called भक्तों के लिए skirt, sleeveless या barmuda पहन कर प्रवेश वर्जित की तख़्ती लगाते हैं।


ये वही लोग हैं, जो .. Sports Channel को भी Fashion Channel की तरह देखते हैं और हम-आप अगर Fashion Channel को Discovery Channel की तरह भी देखते हैं, तो उनके पेट में मरोड़ होने लगती है।


ये वही लोग हैं, जो किसी के पैरहन से उसका चरित्र चित्रण या आकलन करते हैं। हद हो गयी यार !!!


याद होगा कि हम सभी ने कोरोना काल में तत्कालीन परिस्थितिवश अपने-अपने चेहरे पर मास्क लगाए थे, ना कि कोरोना वायरस को मास्क पहनाया था। तो अगर जिस समाज को किसी महिला की सुन्दरता से उनकी नीयत बिगड़ने का भय है, तो उस समाज को अपनी नीयत पर पर्दे डालने की ज़रूरत है, ना कि उस महिला को अपने चेहरे या शरीर को पर्दे में बंधक बनाने की ज़रूरत है .. शायद ...




Wednesday, January 28, 2026

ABC नियम ...


कल तक UGC के 2026 वाले नए क़ानून का उठा-पटक चल ही रहा था, कि आज अजीत पवार जी की दुर्घटनाग्रस्त अकाल मृत्यु ने News Channel वालों की Topic ही change कर दी। यूँ है तो ये एक दुखद घटना ... 

परन्तु आज ही एक और महत्वपूर्ण ख़बर सुनी है कि आज ही Supreme Court में देश के स्वदेशी कुत्तों के बारे में चल रही सुनवाई की एक और कड़ी आगे बढ़ी है। News Channel वालों की Coverage इस समाचार के लिए नहीं थी शायद। पर इस दौरान Supreme Court ने सभी राज्यों को ABC नियमों यानी Animal Birth Control के तहत कुत्तों की नसबंदी, टीकाकरण और उन्हें उचित Shelter Home (?) में रखने का निर्देश दिया है। कल भी सुनवाई होगी .. शायद ... 

अगर इस विषय पर मैं अपनी बतकही आप सभी देश के बुद्धिजीवियों के द्वारा जज साहिब तक पहुँचा पाता तो .. कहता .. जज साहिब ! .. इस देश की बढ़ती मानव जनसंख्या से जो नाना प्रकार की समस्याएं प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से जन्म ले रही हैं और देश की जनसंख्या पड़ोसी देश से भी ज़्यादा होकर विश्व का सर्वाधिक जनसंख्या वाला देश बन गया है हमारा देश। तो आप Human Birth Control के लिए कब तक और क्या प्रावधान लाएंगे ? या अधिकतम जनसंख्या से ही विश्वगुरु बनने-बनाने का इरादा है आपका ? आएँ ?

कहता .. जज साहिब ! .. जैसे विश्व भर का हर मुसलमान आतंकवादी नहीं होता, परन्तु हर आतंकवादी मुसलमान ही होता है। जैसे हर मांसाहारी इंसान असंवेदनशील नहीं होता, परन्तु असंवेदनशील इंसान ही मांसाहारी होता है। जैसे हर शराबी विवेकहीन नहीं होता, परन्तु विवेकहीन इंसान ही शराबी होता है। ठीक वैसे ही हर कुत्ता काटने वाला नहीं होता, परन्तु हर काटने वाला सजीव प्राणी कुत्ता ही होता है। चाहे वो काटने वाला चौपाया कुत्ता हो या फिर दो पैरों वाले इंसान के शरीर में बलात्कारी कुत्ता या इंसानी भेड़िया हो। 

कुत्ते के काटने पर Rabies से बचने के लिए दवा के बाज़ारों में तो Injections उपलब्ध हैं। परन्तु .. एक बलात्कृत बच्ची के Broken Hymen Membrane यानी शीलभंग का क्या इलाज है भला ? जो कि दुर्भाग्यवश तो कतई नहीं .. निःसंदेह दुर्भावनावश इस पुरुष प्रधान समाज में उसकी so  called Virginity की so called Criteria भी है। 

बलात्कार के समय तो so called भूत-प्रेत से बचाने वाला so called हनुमान चालीसा का पाठ या कुरान की आयतें या कलमा या फिर बाइबल के वचन भी उसकी रक्षा करने में असमर्थ रहते हैं।

 .. शायद ...

एक-दो हिंसक कुत्तों के कारण गली के सभी देशी नस्ल के बेसहारा कुत्तों को आवारा नाम देकर उन्हीं हिंसक कुत्तों के साथ एक ही 'शेल्टर (?) होम' में रखे जाने का Supreme Court का फ़ैसला या यूँ कहें कि .. फ़रमान .. ठीक वैसा ही है कि गोया शहर के उन सभी चंद बलात्कारी दरिंदों मर्दों के साथ ही शहर के सभी रोड पर घूमने वाले Gen Z को भी एक ही कारावास में एक साथ बंद कर दिया जाए।

अगर हम सभी अपने-अपने सामर्थ्य  के अनुसार आसपास के लावारिस पशु-पक्षियों के पालनहार बन जाएं, तो Shelter Home (?) की नौबत ही नहीं आएगी। पर नहीं ...

ये सब हमारे दोगले समाज .. ओह Sorry .. दोहरी नीति वाले समाज की वज़ह से है। एक तरफ़ तो ये हर शनिवार काले लिबासों में so called शनि मंदिर में LED के युग में भी दिन के उजाले में दीए जलाएंगे और दूसरी तरफ़ उनके so called वाहन को यानी कुत्ते को अपने दरवाज़े से दुत्कारेंगे। और हाँ, कहते हैं कि कुत्ते शनि ही नहीं .. भैरव के भी वाहन हैं। अभी गत 12 नवम्बर को ही अपने देश में कालभैरव अष्टमी भी मनाई गई है हिंदू धर्मावलंबियों द्वारा। 

और तो और ... पशुपतिनाथ यानी पशुओं के नाथ यानी शिव के मंदिरों में जाकर लोग पत्थर के बने नंदी के कान में कानाफूसी करेंगे, पर अगर उनके दरवाज़े पर या बाज़ार में सजीव बैल या साँड़ दिख जाए तो मार कर भगाएंगे। 

अरे कुछ तो शर्म करो, so called इंसानों ! 

जागो इंसानों जागो ! .. बस यूँ ही ... 

Monday, January 26, 2026

"पूर्ण स्वराज दिवस" (?) ...

 


राष्ट्रीय छुट्टी, मौज-मस्ती, झण्डे, परेड व मिठाइयों के डिब्बे,

बोलना अंग्रेज़ी में एक-दूसरे को Happy Republic Day.


दोहे-चौपाई, कलमा, ख़ूब रटे, पर पलटे नहीं संविधान के पन्ने,

बस इतना ही काफ़ी है हमारा मौसमी देशभक्त बनने के लिए।


गणतंत्र दिवस है, 26 जनवरी .. 26 लोगों को भी याद कर लें,

ना पढ़ने पे कलमा, पहलगाम में गँवाई जिन्होंने अपनी जानें। 


2026 का 26 जनवरी है आया, 1950 से सफ़र तय करते हुए,

पर है 26 जनवरी का उद्गम, 1930 के "पूर्ण स्वराज दिवस" से

.. शायद ...












Wednesday, January 14, 2026

'एस फॉर सन' ...



कहते थे बचपन में अम्मा-बाबू जी 
कि उगता है सूरज पूरब से
और डूबता पश्चिम में।
ऐसा ही था तब दिखता भी,
ऐसा ही था कुछ लगता भी।

फिर आयी बारी अपने पढ़ने की,

स्कूल गए .. 'एस फॉर सन' पढ़ा भी।

पता चला कुछ फिर आगे भी कि 

सूरज तो है स्थिर जगह पर अपनी,

परिक्रमा तो लगाती है पृथ्वी ही।


आगे फिर बहुत बाद में ज्ञात हुआ कि 

बदलता तो है जगह अपना सूरज भी। 

वो भी .. साल भर में बारह-बारह बार जी।

कहते हैं पंडित या खगोलशास्त्री 

और हम सभी भी जिसे संक्रांति।


फिर दुनिया के ज्ञानियों से ज्ञान मिला

कि प्रकृति का नियम है परिवर्तन ही।

अपने व सगे ही क्यों भला .. साथ तो तन भी 

छोड़ ही तो जाता है हमारा .. कभी-ना-कभी।

लगा फिर तो बौना .. बदल जाना यकायक तेरा .. बस यूँ ही ...

Sunday, January 11, 2026

जगराता ...


सुबह लगभग सवा पाँच बजे पटना के गाँधी मैदान में सुबह की सैर के लिए हर आयु वर्ग के लोगों के आने-जाने से पनपी चहल-पहल में से ही एक व्यक्ति .. लगभग पैंतीस वर्षीय पवन पर .. मोटा-मोटी साठ वर्षीय सिद्धार्थ जी की नज़र पड़ते ही ...

सिद्धार्थ जी - " सुप्रभातम् पवन बेटा "

पवन - " सुप्रभातम् 'अँकल' जी " 

वैसे तो पवन और सिद्धार्थ जी आपस में ना तो पड़ोसी हैं, ना सगे-सम्बन्धी हैं, ना ही स्वजातीय और ना ही एक ही नौकरी-पेशे में हैं। परन्तु .. दोनों ही लोगों का परिवार बिहार राज्य के अंगिका भाषी भागलपुर जिला के पीरपैंती गाँव का ही रहने वाला है। 

दरअसल .. कहीं पर भी परोक्ष या अपरोक्ष रूप से व्याप्त क्षेत्रवादिता के माहौल में जब एक ही स्थान के दो निवासी अन्य स्थानों पर प्रवास या पर्यटन के दौरान संयोगवश मिलते हैं तो .. उनकी आपस में घनिष्ठता प्रायः बढ़ ही जाती है। चाहे वह स्थान विशेष अपने शहर ही में कहीं जाने पर .. मुहल्ला, 'सोसाईटी', या गाँव के सन्दर्भ में हो या यही क्षेत्रवादिता अपने शहर या गाँव से देश के भीतर कहीं भी जाने पर जिला, शहर, गाँव या राज्य के सन्दर्भ में हो या फिर देश से बाहर विदेशों में कहीं भी जाने पर अपने देश के सन्दर्भ में हो .. वो वहाँ चाहे सैलानी के रूप में हों या प्रवासी के रूप में हों .. ऐसी परिस्थितियों में समान भाषा-भाषी का होना भी सम्बन्ध को जोड़ने में गोंद-सा असर करता हैं .. शायद ...

सिद्धार्थ जी - " पवन बेटा .. आज तुम अकेले आये हो सुबह की सैर करने .. तुम्हारे पापा और तुम्हारी वो .. छुटकी बिटिया नहीं आयी .. वो .. क्या नाम है उसका .. ? "

पवन - " समीक्षा "

सिद्धार्थ जी - " अरे हाँ, हाँ .. समीक्षा .. उम्र की वज़ह से .. कभी-कभी .. छोटी-छोटी बातें, छोटे-छोटे नाम तक भी याद ही नहीं रह पाते .. हाँ तो .. आज वो .. समीक्षा बिटिया भी नहीं आयी ? .. "

पवन - " 'अँकल' कल पड़ोस के एक घर में सुबह से ही पूजा-पाठ शुरू हुआ और .. सारी रात 'जगराता' होता रहा .. बड़े- बड़े 'डी जे-स्पीकर' पर सुबह से लेकर सारी रात भर फ़िल्मी गाने की 'पैरोडी' वाले भजनों की और वाद्य यंत्रों की तेज़ कानफोड़ू आवाज़ों से घर की खिड़की के काँच और रसोई की 'कटलरी' व 'कप-प्लेट' तक खड़खड़ाते रहे .. "

सिद्धार्थ जी - " ओह ! .. तो ? .. "

पवन - " तो क्या अँकल .. हम सभी लोग शोर की वज़ह से नहीं सो पाए सारी रात .. "

सिद्धार्थ जी - (गुस्सा व चिंतित भाव के साथ) " वो तो स्वाभाविक है बेटा .. यही तो है .. किसी भी धर्म का अपभ्रंश स्वरूप और रीति-रिवाज़ के मुखौटों में हमारे बुद्धिजीवियों के समाज की अंधपरंपराओं की विडम्बना .. लोगों ने मानसिक व आध्यात्मिक जागरण को अपभ्रंश स्वरूप में परिवर्तित कर के .. रात भर जाग कर और लोगों को भी जगा कर तथाकथित पूजा के नाम पर शोर मचाने को ही जागरण या जगराता मान लिया है। "

पवन - " आप तो जानते ही हैं .. पापा दिल के मरीज़ हैं .. उनकी कल शाम से ही तबियत ख़राब है और इन दिनों समीक्षा की 'एग्जाम' भी चल रही है .. वह भी कल ना तो ढंग से पढ़ पायी और ना ही सो पायी .. 'मिसेज़' भी सुबह से .. "

सिद्धार्थ जी - " .. च् .. च् .. "

पवन - " हम भी तो अभी 'मॉर्निंग वॉक' के लिए नहीं आए हैं  'अँकल' जी। बल्कि .. आदतन केवल 'स्ट्रीट डॉग्स' को सुबह-सुबह रोटी खिलाने यहाँ आ गए हैं .. हमारा भी शरीर सुस्त लग रहा है .. "

सिद्धार्थ जी - " च् .. ख़ैर ! .. चलो .. आज मेरी भी सुबह की सैर 'कैंसिल' .. चलो .. चल कर तुम्हारे घर .. पहले तुम्हारे पापा की ख़ैर- ख़बर लेते हैं। "

अब दोनों लोग, सिद्धार्थ जी और पवन, गाँधी मैदान के पश्चिमी 'गेट' से निकल कर छज्जूबाग की तरफ़ पवन के घर की ओर प्रस्थान कर रहे हैं। 

जाते-जाते उन्हें गाँधी मैदान के पश्चिमोत्तर छोर पर तथाकथित महात्मा गाँधी की मूर्ति के चबूतरे के पास कुछ लोगों की झुण्ड बैठी दिखाई दे रही है। वो लोग वहाँ ज़ोर-ज़ोर से बजाए जा रहे करताल और ढोलक की शोर से प्रतियोगिता करते हुए गला फाड़-फाड़ कर हनुमान चालीसा गा रहे हैं। उन सभी की मिलीजुली आवाज़ उन दोनों को विचलीत कर रही है - " जै जै हनुमान गोसाईं .. " - और केवल उन दोनों को ही नहीं वरन् गाँधी मैदान में सभी शांतिप्रिय टहलने वाले लोगों को भी और बैठ कर योग या ध्यान लगाने वाले लोगों के साथ-साथ सुबह-सवेरे पक्षियों के कलरव को भी। 

अब सिद्धार्थ जी अन्यमनस्क-सा पवन से पूछ रहे हैं कि - " लगता है कि आज मंगल (मंगलवार) है .. है ना ? "

" ... महाबीर बिक्रम बजरंगी, कुमति निवार सुमति के संगी ... "





Thursday, January 8, 2026

बूँदों का बतंगड़ ...


देखा है मैने एक सपना,
या कि .. की है एक कल्पना, 
कि हो .. पास हमारे झरने का ग़ुलगपाड़ा, 
चेहरे पे हों हमारे बूँदों का बतंगड़।
हों दूर तक पर्वत-श्रृंखलाएं 
ओढ़े हुए चीड़ के बीहड़।
हो वहाँ चाय की एक झोपड़ी,
जिसमें सुलगती-सी हो चीड़ की लकड़ी।
धुआँ-धुआँ-सी आग में जिसकी 
कुछ सेंकती, कुछ उबालती,
भुट्टे कुछेक एक मासूम-सी लड़की।



और छिलकों पे भुट्टों के परोसती

हम जैसे सैलानी अपने ग्राहकों को

नर्म-गर्म सिंके-उबले भुट्टे के संग 

नमक-नींबू-मिर्ची की चटक जुगलबंदी।

अपने दोनों हाथों में लिए तुम भुट्टे

एक में सिंके और दूसरे में उबले हुए।

सिंका हुआ स्वयं खाती-चबाती-गुनगुनाती

और उबला हुआ मुझे खिलाती-पुचकारती,

अपने-अपने स्वाद के अनुसार और वहीं 

गुड़ वाली गर्मागर्म कड़क चाय से भरे 

भाप उगलते हों दो अदद कुल्हड़।

और .. 

वहीं पर .. 

नर्म-नर्म बुग्याल पर

हो आग़ोश में एक-दूजे की बैठी 

हम दोनों की एक अदद जोड़ी।

और हों .. 

हम दोनों के दोनों ही अल्हड़।

लिपटते, चिपटते, खुल्लम-खुल्ला,

हो जैसे प्यार हमारा 

मानो ..  बस्स ! .. 

खुला खेल फर्रुखाबादी ..बस यूँ ही ...







Monday, January 5, 2026

'इत्यादि' का इत्यादि ...





क्या ...

राजेश जोशी की कविता 'इत्यादि' का इत्यादि हूँ मैं ?

या फिर ..

गोरों के लिए काले पानी वाली तेज़ाबी आँधी हूँ मैं ?

या ..

आज़ादी के नाम पे हुए उस बँटवारे की बर्बादी हूँ मैं ?

या ..

कर्ज़दार विवश आत्महंता किसान की त्रासदी हूँ मैं ?

या ..

आत्महंता किसान के अनाथ परिवार की आधि हूँ मैं ?


क्या ..

राजेश जोशी की कविता 'इत्यादि' का इत्यादि हूँ मैं ?

या फिर ..

भ्रष्टाचारी का ख़ाकी या सज़ायाफ़्ता की खादी हूँ मैं ?

या ..

बढ़ती ज्यामितीय आकार से वतन की आबादी हूँ मैं ?

या ..

विकास की आड़ में कुदरती आपदा की मुनादी हूँ मैं ?

या ..

धर्मनिरपेक्ष होकर भी आरक्षण भोगी जातिवादी हूँ मैं ?


क्या ..

राजेश जोशी की कविता 'इत्यादि' का इत्यादि हूँ मैं ?

या फिर ..

निःसहाय, परवश बलात्कृत की झीनी आपत्ति हूँ मैं ?

या ..

राजा-महाराजाओं के अंतःपुर, हरम की व्युत्पत्ति हूँ मैं ?

या ..

एक प्रेम-निशानी परन्तु समाज की अवैध संतति हूँ मैं ?

या ..

व्यभिचारी नरों की जननी, कोठेवाली की उपाधि हूँ मैं ?


क्या ..

राजेश जोशी की कविता 'इत्यादि' का इत्यादि हूँ मैं ?

या फिर ..

अंधपरंपराओं को रीति-रिवाज मानने का आदी हूँ मैं ?

या ..

पृथ्वी का वर्तमान भर या पूरे ब्रह्माण्ड का आदि हूँ मैं ?

या ..

हूँ जीवन रेखा से बँधा नश्वर शरीर भर या अनादि हूँ मैं ?

या ..

वीर्य-बूँद से भस्म तक का राही, आज मांस-पिंडी हूँ मैं ?

बिहारी था कभी, राज्य बँट जाने से अब झारखंडी हूँ मैं ?