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Tuesday, October 29, 2019

पाई(π)-सा ...

180° कोण पर
 अनवरत फैली
  बेताब तुम्हारी
   बाँहों का व्यास
    मुझे अंकवारी
     भरने की लिए
      एक अनबुझी प्यास ...

और ...
 360° कोण तक
  निरन्तर पसरती
   तुम्हारी मायूस
    निगाहों की परिधि 
     करती मेरी किसी
      गुमशुदा-सी तलाश ...

तुम्हारे ...
 हृदय-स्पन्दन का केन्द्र
  जिसके इर्द-गिर्द
   मेरी ख़ातिर
    रचता तुम्हारा मन
     एक प्रेम-वृत्त
      और ...
       मैं और वजूद मेरा
        बस ...
         उस प्रेम-वृत्त का
          पाई(π)-सा ...

है ना ... !? ...