Sunday, September 20, 2026

उपासना एक्सप्रेस

 


(१) अनायास उस अजनबी युवती को संबोधित करते हुए मेरे मुँह से निकल पड़ा है- "आपनेर नाम टा की ?"। (आपका नाम क्या है ?)

वह मुस्कराते हुए बोली - "मोनालिका .. कैनो ?" (क्यों ?)


(२) वह अचरज भरे लहज़े में मुझसे पूछ बैठी- "आपनी की .. बंगाली, ना बिहारी ?" (आप बंगाली हैं या बिहारी ?)


(३) मोनालिका - "बिहारी झारखंडी ? .. मतलब ?"


(४) मोनालिका - "पर अंकल .. आप मेरी मम्मी का नाम कैसे जानते हैं ?"


(५) उसके हाथ में क़ैद किताब और किताब के क़ैद से झाँकते हुए बुकमार्क की ओर इशारा करके, उस किताब और बुकमार्क के प्रति अपना ऊहापोह  मिटाने के लिए पूछना पड़ा- "एई बोई टा कार ?" (ये किताब किसकी है ?)


(६) मैं - "नहीं, वो बात नहीं है। मोनालिका को जब पता चलेगा, कि मैं और तुम रात में यहाँ थे, तो वो क्या सोचेगी ?"

दीपाली - "मोनालिका अपनी माँ को अच्छी तरह जानती है विशु। तुम्हें तो अपने पर भरोसा है ना ?"

मैं - "हाँ, है।"

दीपाली - "तो फिर किसे साबित करना है हमारे चरित्र के बारे में ? बोलो ! .. आज रात यहीं रुको .. मिलकर बातें करेंगे। पुरानी यादों को ताज़ा करने के लिए मैं गाऊंगी और तुम सुनना।"

तभी दीपाली के फ़ोन बजने पर हम दोनों का ध्यान उस तरफ़ गया। दीपाली फ़ोन पर बात करते हुए - "हेलो ! मोनालिका, कैसी है श्वेता की मॉम ?"


"उपासना एक्सप्रेस" को पढ़िए, जिनमें उपरोक्त सभी सवालों के उत्तर हैं। 

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बस यूँ ही ...

2 comments:

  1.  आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों के आनन्द में सोमवार  21 सितंबर, 2026 को लिंक की जाएगी ....  http://halchalwith5links.blogspot.in  पर आप भी आइएगा ... धन्यवाद!

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