Monday, April 27, 2026

पंचम वेद ... (५)_सोलह सोमवार का व्रत ...



"पंचम वेद ...", "पंचम वेद ... (२)_अ नेशन विदाउट वुमन !", "पंचम वेद ... (३)_आक्रोश !", "पंचम वेद ... (४-अ)_ 'प्रोपेगैंडा' !" एवं "पंचम वेद ... (४-ब)_ 'प्रोपेगैंडा' !" के बाद आज उसकी अगली कड़ी .. "पंचम वेद ... (५)_सोलह सोमवार का व्रत" .. आप सभी के लिए  :-

क्योंकि .. " 'पिक्चर' अभी बाक़ी है मेरे दोस्त " ...


आज की बतकही (आलेख) के शीर्षक में मुझ जैसे नास्तिक इंसान (?) द्वारा "सोलह सोमवार का व्रत" जैसे शब्द समूह जोड़ने का कारण हम इस आलेख के अंत में आप सभी से साझा करेंगे .. बस यूँ ही ...


सर्वप्रथम .. प्रसंगवश अभी हम तीन अभिनेताओं और एक लेखक-निर्देशक के बारे में संक्षिप्त में चर्चा कर लेते हैं। फिर आज की फ़िल्म की बातें करेंगे।


आज के तीन अभिनेताओं में पहला हैं- सुधीर पांडे जी, जो हिंदी भाषी फिल्मों, टी वी सीरियलों और रंगमंचों के जाने-माने वरिष्ठ अभिनेता हैं। वह "भारतीय फिल्म एवं टेलीविजन संस्थान" (FTII), पुणे से स्नातक हैं। उनके साथ लगभग पाँच दशकों से सहायक, चरित्र और नकारात्मक भूमिकाओं की एक लम्बी फ़ेहरिस्त है। उत्तराखंड के अल्मोड़ा में पाटिया उनका पैतृक गाँव है। 

उनके पिता देवकी नंदन पांडे जी आकाशवाणी (AIR) के प्रसिद्ध हिंदी समाचार वाचक थे। 'रेडियो-ट्रांज़िस्टर' युग के लोगों को उनकी विशेष आवाज़ की तरंगों की यादें आज भी कानों में एक खनक महसूस करा जाती है। वह 'रेडियो' से प्रसारित होने वाले नाटकों में अभिनय भी किया करते थे। वह भीष्म साहनी जी के उपन्यास "तमस" पर आधारित बनी 'टी वी सीरियल' में भी वनप्रस्थी जी नामक एक पात्र का अभिनय किए थे। 

सुधीर पांडे जी 1986-87 में डी डी नेशनल पर प्रसारित होने वाली एक सौ पाँच एपिसोड वाली 'टी वी सीरियल'- "बुनियाद" में मुख्य पात्र- हवेलीराम (आलोकनाथ) के पिता लाला गैंदामल की भूमिका में नज़र आए थे। धैर्यपूर्वक फ़िल्मों को देखने वाले दर्शकों को इनकी 2003 में आई फ़िल्म- "मातृभूमि : अ नेशन विदाउट वुमन" अवश्य देखनी चाहिए। जिसमें ये ट्यूलिप जोशी, पीयूष मिश्रा, आदित्य श्रीवास्तव और सुशांत सिंह के साथ रामशरण की भूमिका में नज़र आते हैं।


आज के दूसरे अभिनेता हैं अविनाश तिवारी, जो हिंदी भाषी फिल्मों, 'टी वी सीरियलों' और 'थिएटरों' के जाने-पहचाने युवा अभिनेता हैं। जो जन्में तो बिहार के गोपालगंज जिले में, पर पले-बढ़े और लिखे-पढ़े मुम्बई में। अभिनय का कीड़ा ही उन्हें चौथे 'सेमेस्टर' में 'इंजीनियरिंग' की पढ़ाई छोड़वा कर 'थिएटर' में शामिल करवा दिया था। बाद में अपनी अभिनय कला की क्षमता को और भी निखारने के लिए "बैरी जॉन एक्टिंग स्टूडियो" (BJAS), नई  दिल्ली से और तत्पश्चात "न्यूयॉर्क फिल्म अकादमी" (NYFA) से भी अभिनय का प्रशिक्षण लिए हुए हैं।

इन्हें टी वी धारावाहिक- युद्ध (2014) और फ़िल्म- लैला मजनू (2018), बुलबुल (2020), सिकंदर का मुकद्दर (2024) से पहचान मिली। नेटफ्लिक्स पर खाकी: द बिहार चैप्टर (2022) के अभिनय के लिए भी इन्हें काफ़ी प्रशंसा प्राप्त हुई है। इनकी अन्य फ़िल्में थीं- तू ही मेरा संडे, बम्बई मेरी जान, काला एवं मडगांव एक्सप्रेस। 

हालांकि इम्तियाज़ अली द्वारा प्रस्तुत अविनाश तिवारी की 2018 में आई फ़िल्म- लैला मजनू यूँ तो 'बॉक्स ऑफिस' पर पिट गयी थी, परन्तु जब शीघ्र ही 'ओटीटी प्लेटफ़ॉर्म' पर आयी तो लोगों ने पसन्द किया, क्योंकि प्रायः अधिकांशतः Gen-Z वाली युवा पीढ़ी ही 'ओटीटी प्लेटफ़ॉर्मस्' पर सक्रिय रहती है और रूमानी फ़िल्में उन्हें अत्यधिक आकर्षित भी करती हैं। युवा दर्शकों की माँग पर ही इसे पुनः छः वर्षों बाद 2024 में सिनेमा घरों में प्रदर्शित किया गया था और इस बार 2024 में सिनेमा घरों में प्रदर्शित वही 2018 की फ़िल्म- लैला मजनू  'हिट' हो गई थी। 


प्रसंगवश .. अविनाश तिवारी से जुड़ी एक और घटना .. देहरादून में हर वर्ष साहित्य, सिनेमा और समाज जैसे विषय पर तीन दिवसीय ज्ञानवर्धक एवं मनोरंजक कार्यक्रम "देहरादून साहित्य महोत्सव" (DDLF) के तहत 2024 में भी 8 से 10 नवम्बर तक यह कार्यक्रम मनाया गया था। कार्यक्रम के अन्तिम दिन 10 नवम्बर 2024, रविवार को इसी फ़िल्म- लैला मजनू के प्रचार-प्रसार के लिए इस फ़िल्म में क़ैस भट्ट उर्फ़ मजनू की भूमिका निभाने वाले अभिनेता- अविनाश तिवारी के साथ इस फ़िल्म के लेखक व निर्माता- इम्तियाज़ अली, जो मूल रूप से झारखंड के जमशेदपुर के रहने वाले हैं और युवाओं के बीच विशेष लोकप्रिय 'स्टोरी टेलर'- लक्ष महेश्वरी, जो मध्यप्रदेश के इंदौर के रहने वाले हैं। जिन्होंने आर्मी पब्लिक स्कूल, इंदौर से पढ़ाई की है और आगे प्रबंधन अध्ययन संस्थान, इंदौर से वित्त में एमबीए किया है। ये इस फ़िल्म के प्रचार-प्रसार को अपनी 'स्टोरी टेलिंग' के माध्यम से नया जामा पहनाने के लिए मंच पर उपस्थित हुए थे। लक्ष महेश्वरी का बायाँ हाथ जन्म से ही नहीं है।  परन्तु कृत्रिम हाथ से ही वह सामान्य व्यक्ति की तरह काम कर पाते हैं।

मंच पर विराजमान अविनाश तिवारी, इम्तियाज़ अली और लक्ष महेश्वरी के समक्ष अन्य आम दर्शकों की भीड़ का एक हिस्सा भर बने तब हम भी दर्शक दीर्घा में मंत्रमुग्ध बैठे हुए थे।



आज के तीसरे अभिनेता हैं रोहित चौधरी। वह भी भारतीय युवा अभिनेता हैं। इनका जन्म तो इटावा में हुआ, परन्तु आगे की पढ़ाई लखनऊ व कानपुर में हुई है। 2003 में इन्होंने थिएटर शुरू किया। ये संगीत नाटक अकादमी, 'भारतेंदु अकादमी ऑफ ड्रामेटिक आर्ट्स' और राय उमानाथ बाली ऑडिटोरियम में अभिनय कर चुके हैं। बाद में 'नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा' (NSD) से प्रशिक्षण प्राप्त करके फ़िल्मों में आए। कई फ़िल्में .. मसलन- ज़ंगूरा, झुमरू, बरेली की बर्फी, बहुत हुआ सम्मान, कनपुरिये, जबरिया जोड़ी और गदर-2 में भी उनकी भूमिकाओं के लिए उन्हें जाना जाता है। 



फिर चौथे में .. लेखक सह निर्देशक प्रशांत झा जी हैं, जिनके बारे में ज़्यादा जानकारी तो उपलब्ध नहीं है; परन्तु वह हम दो हमारे दो (2021) गुस्ताख़ इश्क (2025) जैसी फ़िल्मों के बाद वर्तमान में "गिन्नी वेड्स सन्नी-2" (गिन्नी वेड्स सन्नी की दूसरी कड़ी-Second Sequel) जैसी फ़िल्म के लेखक और निर्देशक भी हैं।


इस फ़िल्म- "गिन्नी वेड्स सन्नी-2" को ज़ी स्टूडियोज़ और सौंदर्या प्रोडक्शन ने प्रस्तुत किया है। इसके निर्माता विनोद बच्चन और उमेश कुमार बंसल हैं। इस फिल्म में मुख्य भूमिका में अविनाश तिवारी और मेधा शंकर के अलावा लिलेट दुबे, सुधीर पांडे, गोविंद नामदेव, गोपी भल्ला, नयनी दीक्षित, विश्वनाथ चटर्जी और रोहित चौधरी सहित कई प्रतिभाशाली कलाकार हैं। 

फ़िल्म- "गिन्नी वेड्स सन्नी-2" के लिए लेखक-निर्देशक प्रशांत झा जी का कहना है, कि " गिन्नी वेड्स सन्नी- 2 " के साथ हमारा लक्ष्य एक संपूर्ण पारिवारिक मनोरंजक फिल्म बनाना था। एक ऐसी फिल्म जो हास्य, नाटक, संगीत और भावनाओं को सहजता से मिलाकर एक सुसंगत गहन सिनेमाई अनुभव प्रदान करें। "

यूँ देखा जाए तो .. रोमांस, संगीत, पारिवारिक ड्रामा से भरपूर और दिल को छू लेने वाले पलों के मिश्रण के साथ यह फ़िल्म बड़े पर्दे पर एक आकर्षक सिनेमाई अनुभव आप सभी को प्रदान करने के लिए 24 अप्रैल 2026 को भारतीय सिनेमा घरों में प्रदर्शित किया जा चुका है।


अब NSD, FTII, NYFA और BJAS जैसे संस्थानों से प्रशिक्षित उपरोक्त दो-तीन कलाकारों के साथ किसी अप्रशिक्षित अभिनय प्रेमी को एक-दो संवादों वाली छोटी-सी भूमिका निभाने का अवसर प्राप्त हो जाए और .. वो भी एक बड़े पर्दे के लिए तो .. उसके मन में कुछ-कुछ होने लगता है। बशर्ते उसके अन्दर अभिनय का कीड़ा भले ही सोया हुआ ही हो, पर जीवित हो। वैसे भी लोग कहते हैं कि कला की किसी भी विधा का कीड़ा अगर एक बार किसी को काट ले, तो उसका प्रभाव उस पर ताउम्र रहता है।


दो घंटे व चौदह मिनट की फ़िल्म- "गिन्नी वेड्स सन्नी-2" में एक दृश्य है .. ऋषिकेश के गंगा घाट का। जहाँ अपने एक 'इंटर पास' बदनाम पहलवान बेटा (अविनाश तिवारी) की शादी नहीं हो पाने के कारण एक चिन्तित और परेशान पिता (सुधीर पांडे) घाट किनारे बैठे एक ज्योतिष (मैं स्वयं- सुबोध) के पास आते हैं। मतलब दो-दो वास्तविक ब्राह्मणों (अविनाश तिवारी व सुधीर पांडे) के बीच मुझ जैसे एक ग़ैर-ब्राह्मण नास्तिक कलाकार को एक भविष्यवक्ता पुजारी के पात्र का अभिनय करते हुए .. मुझे रोमांच की अनुभूति हो रही थी। 


मुख्य पात्र सन्नी के पिता- रामसेवक चतुर्वेदी का अभिनय करने वाले काफ़ी वरिष्ठ कलाकार सुधीर पांडे जी के सम्बोधन के लिए मेरे संवाद के अनुसार "तुम" की जगह एक-दो बार "आप" का सम्बोधन 'शूटिंग' के दौरान मेरे मुँह से निकल जा रहा था। परन्तु इस फ़िल्म के लेखक-सह-निर्देशक प्रशांत झा जी ने, एक मधुर और मिलनसार स्वभाव के व्यक्ति होने के नाते, इसमें सुधार के लिए बहुत ही प्यार से एक बार मुझे टोके थे। हालांकि 'एडिटिंग' के बाद भी अन्ततः मेरे द्वारा बोला गया "आप" सम्बोधन वाला ही संवाद फ़िल्म में आया है।


उपरोक्त 10 नवम्बर 2024, रविवार के "देहरादून साहित्य महोत्सव" (DDLF) की चर्चा के आधार पर कहें तो .. उसके ठीक 32 सप्ताह पश्चात 22 जून 2025, रविवार को हम ऋषिकेश में राम झूला के निकट गीता प्रेस मिष्ठान दुकान के ठीक सामने गंगा नदी के किनारे एक घाट पर इसी अविनाश तिवारी के साथ बैठे फ़िल्म- "गिन्नी वेड्स सनी- 2" के लिए कैमरे का सामना कर रहे थे। 'रोल, कैमरा, एक्शन' बोले जाने और 'क्लापरबोर्ड' (Clapperboard) की गतिविधि शुरू होने के पहले .. जब हम सभी कलाकार अपने-अपने पात्र के अनुसार अपनी-अपनी स्थिति में अपने-अपने स्थान पर पालथी मार कर बैठे हुए थे तो हमने अपनी बाईं ओर बैठे अविनाश तिवारी को ये कहने से नहीं रोक पाया कि .. " पिछले साल छः-सात माह पहले आपके सामने मैं "देहरादून साहित्य महोत्सव" में दर्शकों की भीड़ में बैठा हुआ था। तब नहीं सोचा था कि आज हम साथ बैठ कर .. इस फ़िल्म के दृश्य के लिए साथ-साथ अभिनय कर रहे होंगे। " ये बात सुनकर एक मुस्कान तैर गई थी उनके चेहरे पर और उन्होंने बधाई देते हुए मुस्कुरा कर हाथ मिलाया।


अब एक प्रशिक्षित फ़िल्मी कलाकार के साथ मुझ जैसा एक अप्रशिक्षित कलाकार अभिनय करता है, तो स्वयं में कुछ-कुछ हीन भावना आती तो है। पर .. फिर अचानक .. "लल्लनटॉप" पर सौरभ द्विवेदी द्वारा 'वेबसीरीज'- पंचायत की सुनीता राजवार के साथ-साथ अन्य दो कलाकारों के बनाए गए 'पॉडकास्ट' की याद आ जाती है। उत्तराखंड के हल्द्वानी की सुनीता राजवार, जो 'वेबसीरीज' पंचायत की क्रांति देवी और 'वेबसीरीज' गुल्लक में बिट्टू की मम्मी बनकर लोगों में काफ़ी लोकप्रिय हो चुकी हैं। उनसे जब सौरभ द्विवेदी ने उपरोक्त 'पॉडकास्ट' में पूछा कि वह जब अप्रशिक्षित कलाकारों के साथ काम करती हैं, तो उन अप्रशिक्षित लोगों के साथ काम करते हुए उन्हें कुछ कमतर लगता है क्या ? तब सुनीता राजवार का बोलना कि वह इस विषय में ठीक उल्टा सोचती हैं। उनका मानना है कि जो काम वह एनएसडी (NSD) से प्रशिक्षण लेने के बाद कर रही हैं, वही काम साथ में काम करने वाले वो सभी कलाकार अप्रशिक्षित होकर भी कर पा रहे हैं, तो फिर .. वे लोग तो उनसे ज़्यादा बेहतर हुए, क्योंकि वे लोग बिना प्रशिक्षण के वही काम दक्षता के साथ कर पा रहे हैं, जो वह एनएसडी (NSD) से प्रशिक्षण लेकर कर रही हैं। "लल्लनटॉप" के 'पॉडकास्ट' की 'यूट्यूब' पर यही सुनी-देखी बातें याद कर के फिर हमारा भी मन संतुलित-संयमित हो कर पूर्णतः सकारात्मक हो जाता है।


अंत में .. हमारी 'कास्टिंग' व चयन के लिए देहरादून के Filmchii Studio की टीम के साथ-साथ इस फ़िल्म के लेखक- निर्देशक प्रशांत झा जी के टीम को मन से नमन और आभार प्रकट करता हूँ, जिन्होंने मेरे कई 'ऑडिशंस' के बाद मेरे अभिनय को पुनः एक बार बड़े पर्दे पर प्रदर्शन करने का यह सुनहरा अवसर प्रदान किया।





और हाँ ... आज के शीर्षक में "सोलह सोमवार का व्रत" जैसा शब्द समूह जोड़ने का कारण इस आलेख के अंत में साझा करने का हमारा वादा स्वयं ही तोड़ते हुए .. आप सभी से नम्र निवेदन कर रहे हैं, कि आप सभी अपने-अपने परिवार के साथ अपने-अपने शहर के 'मल्टीप्लेक्स' में जाइए और फ़िल्म- "गिन्नी वेड्स सन्नी-2" का आनन्द लीजिए .. फिर वहीं हम ही आपको आज के शीर्षक के "सोलह सोमवार का व्रत" जैसे शब्द समूह का प्रयोजन बतलाएंगे .. और साथ ही प्रत्येक शुक्रवार को दही-चीनी खाने के लाभ भी, परन्तु .. आपके शहर के किसी 'मल्टीप्लेक्स' के बड़े पर्दे पर .. शायद ...

पुनः उसी 'डायलॉग' .. " 'पिक्चर' अभी बाक़ी है मेरे दोस्त। ", के आधार पर .. शेष बातें जल्द ही .. इसकी अगली कड़ी - "पंचम वेद ... (६)_क, ख, ग से BPL कार्ड तक ... !" के साथ .. बस यूँ ही ...








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