Thursday, April 23, 2026

"पंचम वेद ... (४-ब)_ 'प्रोपेगैंडा' !"

सरवर चिश्ती

"पंचम वेद ...", "पंचम वेद ... (२)_अ नेशन विदाउट वुमन !", "पंचम वेद ... (३)_आक्रोश !"  और "पंचम वेद ... (४-अ)_ 'प्रोपेगैंडा' !" के बाद आज उसकी अगली कड़ी- "पंचम वेद ... (४-ब)_ 'प्रोपेगैंडा' !" .. आप सभी के लिए  :-

क्योंकि .. " 'पिक्चर' अभी बाक़ी है मेरे दोस्त " ...


वर्तमान में घटी सर्वविदित नासिक व अमरावती की दो पाशविक एवं मक्कारी भरी घटनाओं की चर्चा तथा आठ सौ चौंतीस साल पहले 1192 के उपलब्ध इतिहास के पन्नों को टटोल कर मोइनुद्दीन हसन चिश्ती उर्फ़ तथाकथित हज़रत ख्वाजा गरीब नवाज़ और उसके शागिर्दों की मंशा एवं उनके काले कारनामों से अवगत होने के पश्चात अब ...


चौंतीस साल पहले 1992 में :-


अजमेर के जयपुर रोड में मीर शाह अली कॉलोनी में महिलाओं की शिक्षा के लिए दस एकड़ में डॉ हाजी मोहम्मद दाऊद शरीफ द्वारा 1959 में स्थापित महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय से संबद्ध सोफिया गर्ल्स कॉलेज नामक एक स्वायत्त शिक्षण संस्थान है। जिसे अब तक NAAC (National Assessment and Accreditation Council) द्वारा 'A+' ग्रेड मिल चुका है। हालांकि इस ग्रेड के बिना मिले भी .. 1992 में भी यह लड़कियों के लिए उस शहर का सबसे प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान था।

उस दौर में 'सोशल मीडिया' और 'इंटरनेट' नहीं होने के बावजूद जब एक दिन एक अख़बार के 'फ्रंट पेज' पर उसी प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान की छात्राओं की 'न्यूड फोटोज' 'ब्लर' करके छापे गए तो पूरे देश में तहलका मच गया। 

अचानक इसी प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान की छात्राओं की एक के बाद एक होने वाली आत्महत्या के सिलसिले ने भी लोगों का ध्यान खींचा। उन दौर में अख़बार के पन्नों पर छपी कुछ 'हेडलाइंस' की निम्न बानगी ही काफ़ी हैं .. उन दिनों की क्रूरता की सच्चाई बयान करने के लिए। मसलन -  

"आत्महत्या नहीं बल्कि हत्या है और इसके पीछे शहर के बड़े लोगों का हाथ है", 

"250 कॉलेज गर्ल्स हुईं शिकार, बँटने लगी न्यूड फोटो", 

"एक के बाद एक सुसाइड से उठा पर्दा", 

"28 परिवार रातोंरात हुए लापता" इत्यादि .. इत्यादि।


चूंकि उस कांड में शहर के रसूख़दार परिवारों के लोग शामिल थे, तो उस 'केस' को शुरुआत में भरसक दबाने की कोशिश की गयी। प्रशासन और पुलिस तो मुज़रिमों की मानो चाकरी कर रही थी। परन्तु कुछेक दिलेर 'मीडिया' और 'मास' के दबाव में हुई जाँच-पड़ताल और पक्के सुबूतों के आधार पर राजस्थान के अजमेर में उसी हिंदू विरोधी मोइनुद्दीन हसन चिश्ती के दरगाह- अजमेर शरीफ़ की देखभाल करने वाले ख़ादिमों की पीढ़ियों में से एक फारूख चिश्ती को सालों तक होने वाले देश के सबसे बड़े सामूहिक बलात्कार व भयादोहन कांड का 'मास्टरमाइंड' पाया गया था। 

समस्त जाँच-पड़ताल के बाद निम्न 18 आरोपियों के खिलाफ़ 'केस' दर्ज किया गया था :-

१) फारूक चिश्ती, जो तत्कालीन युवा कांग्रेस का शहर अध्यक्ष भी था, २) नफीस चिश्ती, जो तत्कालीन युवा कांग्रेस का शहर उपाध्यक्ष था, ३) अनवर चिश्ती, जो संयुक्त सचिव था और ये तीनों उसी मोइनुद्दीन हसन चिश्ती उर्फ़ तथाकथित हज़रत ख्वाजा गरीब नवाज़ के दरगाह के ख़ादिम चिश्ती परिवार से हैं। ४) अलमास महाराज, जो पूर्व कांग्रेस विधायक का नजदीकी रिश्तेदार था और आज तक वह फरार ही है। ये सभी शहर के रसूख़दार व दबंग लोग थे या .. यूँ कहें कि आज भी हैं।

इनके अलावा ५) इशरत अली, ६) इकबाल खान, ७) सलीम चिश्ती, ८) सैयद जमीर हुसैन, ९) सुहैल गनी, १०) मोईजुल्‍लाह पुत्तन इलाहाबादी, ११) नसीम अहमद उर्फ टार्जन, १२) जुहूर चिश्‍ती, १३) मोहिबुल्लाह उर्फ मेराडोना, १४) पुरुषोत्तम उर्फ बबली के अलावा १५) परवेज अंसारी, १६) कैलाश सोनी, १७) महेश लुधानी और १८) हरीश तोलानी नामक दोषियों के नाम केस दर्ज़ हुआ था। जिनमें से अंतिम चार नाम, परवेज अंसारी, कैलाश सोनी, महेश लुधानी और हरीश तोलानी सुनवाई के दौरान ही बरी हो गए थे।

जब पीड़िताओं को बयान के लिए सामने आने की बारी आयी तो कुछ लोक-लाज से मौन रहीं, कुछ हिम्मत करके तीस-पैंतीस के आसपास ही बयान के लिए आगे आईं। परन्तु इनमें से भी अधिकांश को डरा-धमका कर चुप करा दिया गया। अंत में मात्र दो लड़कियों की गवाही पर ही उपरोक्त सभी मुज़रिम पकड़े गए थे।

पीड़िताओं में से हिम्मत करने वालियों ने अपने बयान में ऐसी बातें कहीं, जिसने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। उनका कहना था, कि पहले एक छात्रा को प्रेमजाल में उलझा कर शहर के रसूख़दार परिवारों के कुछ लड़कों ने उसके साथ दुष्कर्म किया और चूंकि वो ज़माना मोबाइल का नहीं था, तो चोरी से उसकी आपत्तिजनक फोटो खींची गई। फिर उसे शहर भर में 'सर्कुलेट' कर देने की उस पीड़िता को धमकी दी गई और उसके आपत्तिजनक फोटो को नष्ट करने के बदले में उसे किसी दूसरी लड़की को बहला-फुसला कर उन दरिंदों के हवसगाह तक लाने के लिए कहा गया। एक से दो, दो से चार, चार से .. इस तरह ये सिलसिला सैकड़ों की संख्या पार करती गयी।  

इस प्रकार मुस्लिम कट्टरपंथियों ने सैकड़ों हिन्दू लड़कियों का यौन शोषण कर उनकी नंगी तस्वीरें खींची थी। "गैंगरेप" और "ब्लैकमेल" के घिनौना से भी घिनौना स्वरूप को अंजाम दिया गया था। उस शहर में रहने वाले कई लोगों ने अपनी बेटी-बहनों को पेड़ से लाश बनकर लटकते देखा था।

ढाई सौ से भी अधिक पीड़िताओं के न्याय की यात्रा देश की न्याय व्यवस्था की दुर्बलताओं के कारण वर्षों तक उच्च न्यायालय, त्वरित विशेष न्यायालय (Fast Track Special Courts, सर्वोच्च न्यायालय और पॉक्सो (POCSO- Protection of Children from Sexual Offences Act, 2012) 'कोर्ट' के पड़ावों से होती हुई गुजरी। कुछ बरी हो गए, कुछ को उम्रक़ैद की सजा हुई, फिर सजा कम भी कर दी गई। एक तो आज तक फरार है। फिर मुख्य आरोपी अपने आप को बनावटी पागल घोषित कर के जेल से बाहर आ गया। इस प्रकार .. कारण जो भी रहा हो, अन्ततः फांसी की सजा के बिना सैकड़ों पीड़िताओं का न्याय अधूरा ही रह गया।

सर्वविदित है कि ख़बरों के अनुसार उसी मोइनुद्दीन हसन चिश्ती उर्फ़ तथाकथित हज़रत ख्वाजा गरीब नवाज़ के अजमेर दरगाह के ख़ादिम परिवार का गौहर चिश्ती .. हिन्दू दर्जी कन्हैया लाल की निर्मम हत्या के एक आरोपी रियाज अत्तारी से मिला था और “सिर तन से जुदा” का नारा देकर हिन्दुओं को धमकी भी दी थी।

इसी अजमेर शरीफ दरगाह के ख़ादिमों की "अंजुमन सैयद जादगान" नामक संगठन के सचिव सरवर चिश्ती ने उग्र बयान देकर हिंसा को बढ़ावा दिया था और पूरे देश को हिलाने की धमकी भी दी थी। उसने ख़ुद को पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) नामक प्रतिबंधित संगठन का सदस्य बताया था और अजमेर दरगाह से हिन्दुओं के आर्थिक बहिष्कार का आह्वान भी किया था। 

उसके बेटे सैयद अली चिश्ती और आदिल चिश्ती ने हिन्दुओं के लिए नफ़रत दिखलाते हुए हिन्दू देवी-देवताओं का अपमान भी किया था। सरवर चिश्ती ने हमारी हिंदू बहन-बेटियों के विरुद्ध अपमानजनक कथन कही थी, कि - ''लड़की चीज़ ही ऐसी है .. बड़े से बड़ा फिसल जाता है।''


1992 में राजस्थान के शहर अजमेर में घटी उस भयावह सच को "चिश्ती सेक्स स्कैंडल" या "अजमेर दरगाह कांड 1992" भी कहते हैं। अगर आप के परिवार में बहन-बेटी है या नहीं भी है और आप केवल संवेदनशील इंसान हैं, तो इन सब को आज की निम्न फ़िल्म में भी देखकर आपकी आत्मा काँप जाएगी .. शायद ...




फ़िल्म - "अजमेर 92" :-


वर्तमान से लगभग तीन साल पहले 21 जुलाई 2023 को प्रदर्शित हुई दो घंटे इक्कीस मिनट की फ़िल्म - "अजमेर 92" को बनाने के लिए भी तो इसके निर्माता को एक दिल दहलाने वाली उपरोक्त दुर्घटना ने ही प्रेरित की होगी। हालांकि इस फ़िल्म को लेकर तब भी इतनी ही चिल्लपों मची थी, जितनी वर्तमान की सत्य घटनाओं पर आधारित बनी फ़िल्मों के लिए हाय-तौबा मची हुई है। बस एक 'प्रोपेगैंडा' जैसा विशेषण उसके साथ नहीं जुड़ा था। 

हालांकि ... "अजमेर 92" फ़िल्म का 'सो कॉल्ड बॉक्स ऑफिस' पर कुछ ख़ास कमाल हो पाया था। अजमेर बलात्कार कांड पर आधारित इस फ़िल्म के निर्देशक हैं पुष्पेन्द्र सिंह तथा इसके लेखक व पटकथा लेखक हैं सूरज पाल रजक, ज्ञानेन्द्र प्रताप सिंह और पुष्पेन्द्र सिंह की तिकड़ी।

इसके मुख्य अभिनेता हैं करण वर्मा और अभिनेत्री हैं सुमित सिंह। इनके अलावा अन्य कलाकार हैं- ज़रीना वहाब, सयाजी शिंदे, मनोज जोशी, ब्रिजेन्द्र काले, राजेश शर्मा, ईशान मिश्रा, अभिषेक, शालिनी कपूर, सीरत कौर, शहनवाज़ खान, आकाश दाहिया, सिमरन गंगवानी, अनूप गौतम, अलका अमीन इत्यादि। रिलायंस एंटरटेनमेंट (Reliance Entertainment) के इस निर्माण को कला की दृष्टिकोण से IMDb (Internet Movie Database) द्वारा 10 में से 8 'ग्रेड' मिला है।

जबकि "जमीयत उलेमा-ए-हिंद" संगठन के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी के अनुसार फ़िल्म को 'बैन' कर देना चाहिए था, क्योंकि उसके अनुसार यह फ़िल्म अजमेर शरीफ़ के दरगाह को बदनाम करने का प्रयास भर था। 


आपको भी ऐसा महसूस होता है क्या ? ...


दूसरी तरफ़ अभी हाल ही में देहरादून में भीमसेन जोशी जी के सम्मान में "भीमसेन जोशी समारोह" नामक एक सांस्कृतिक कार्यक्रम के मंच पर नृत्यांगना स्वाति सिन्हा कत्थक नृत्य पेश कर रहीं थीं, तो समी उल्लाह ख़ान गायन व हारमोनियम के साथ उनका संगत कर रहे थे। 

ना जाने ऐसे अनूठे माहौल कट्टरपंथियों की भीड़ में कब, कैसे, कहाँ और क्यों विलुप्त हो गए हैं ?


आपको मालूम है क्या ? ...


पुनः 'पॉपुलर डायलॉग' .. " 'पिक्चर' अभी बाक़ी है मेरे दोस्त। ", के आधार पर .. शेष बातें जल्द ही .. इसकी अगली कड़ी - "पंचम वेद ... (५)_सोलह सोमवार का व्रत ... !" के साथ .. बस यूँ ही ... 🙂







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