हाल ही में Google पर एक घटना की जानकारी मिली कि केरल के कोल्लम में एक स्कूल हेडमिस्ट्रेस को 'चूड़ीदार' पहनने के कारण स्कूल के मैनेजर के निर्देशानुसार सिक्योरिटी गार्ड ने गेट पर ही रोक दिया। हालांकि पुलिस के आने के बाद उन्हें अन्दर जाने दिया गया और गार्ड को सस्पेंड भी कर दिया गया।
गत वर्ष की एक ख़बर के मुताबिक़ अपने देश में एक राज्य के माननीय मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी, जो एक social worker होने के नाते एक सफ़ाई अभियान में शामिल हुईं थीं। क्योंकि हर वर्ष की तरह ही गत वर्ष भी so called भक्तगण ने गणेश मूर्ति विसर्जन के दौरान Juhu Beach पर गंदगी फैलायी थी, उसी की सफ़ाई के लिए। उस दौरान उनके पहने गए परिधान के लिए भी सभ्यता-संस्कृति के so called पक्षधर लोग सोशल मीडिया पर ऊटपटाँग प्रतिक्रियाएँ दिए जा रहे थे।
कुछ प्रतिक्रियाओं के अनुसार Public Place में तो उन्हें ऐसी पोशाक पहननी ही नहीं चाहिए थी। ऐसी पोशाक उन महानुभावों के लिए राष्ट्रीय सम्मान का सवाल था।
तो फिर यही लोग देश की तमाम महिला Athlete और महिला तैराक के लिए Public Place पर किस तरह की पोशाक पहनने की सलाह देंगे भला ?
कम पोशाकों के लिए ऐसी छिछोरी प्रतिक्रियाएँ देने वाले ये वही देशभक्तगण और सभ्यता- संस्कृति के so called पक्षधर लोग हैं , जो खैनी और गुटखा मुँह में ठूंस कर Happy Republic Day और Happy Independence Day बोलते हैं।
या 2 October को Dry Day होने से पहले खरीदे गए बोतलों से National Holiday का लुत्फ़ लेते हुए One Leg with Two Peg के साथ Happy Birthday Gandhi बोलते हैं।
ये वही लोग हैं, जो महिलाओं को समुद्र में या swimming pool में नहाते हुए या फिर गंगा स्नान करते वक्त उनके गीले परिधानों में उन्हें ताड़ते रहते हैं।
ये वही लोग हैं जो, पूजन स्थल के भीतर नग्न या अर्द्धनग्न, उत्तरीय वस्त्र या लंगोटी वाली मूर्तियों के रहने पर भी, बाहर से अन्दर जाने वाले so called भक्तों के लिए skirt, sleeveless या barmuda पहन कर प्रवेश वर्जित की तख़्ती लगाते हैं।
ये वही लोग हैं, जो .. Sports Channel को भी Fashion Channel की तरह देखते हैं और हम-आप अगर Fashion Channel को Discovery Channel की तरह भी देखते हैं, तो उनके पेट में मरोड़ होने लगती है।
ये वही लोग हैं, जो किसी के पैरहन से उसका चरित्र चित्रण या आकलन करते हैं। हद हो गयी यार !!!
याद होगा कि हम सभी ने कोरोना काल में तत्कालीन परिस्थितिवश अपने-अपने चेहरे पर मास्क लगाए थे, ना कि कोरोना वायरस को मास्क पहनाया था। तो अगर जिस समाज को किसी महिला की सुन्दरता से उनकी नीयत बिगड़ने का भय है, तो उस समाज को अपनी नीयत पर पर्दे डालने की ज़रूरत है, ना कि उस महिला को अपने चेहरे या शरीर को पर्दे में बंधक बनाने की ज़रूरत है .. शायद ...

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