परन्तु आज ही एक और महत्वपूर्ण ख़बर सुनी है कि आज ही Supreme Court में देश के स्वदेशी कुत्तों के बारे में चल रही सुनवाई की एक और कड़ी आगे बढ़ी है। News Channel वालों की Coverage इस समाचार के लिए नहीं थी शायद। पर इस दौरान Supreme Court ने सभी राज्यों को ABC नियमों यानी Animal Birth Control के तहत कुत्तों की नसबंदी, टीकाकरण और उन्हें उचित Shelter Home (?) में रखने का निर्देश दिया है। कल भी सुनवाई होगी .. शायद ...
अगर इस विषय पर मैं अपनी बतकही आप सभी देश के बुद्धिजीवियों के द्वारा जज साहिब तक पहुँचा पाता तो .. कहता .. जज साहिब ! .. इस देश की बढ़ती मानव जनसंख्या से जो नाना प्रकार की समस्याएं प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से जन्म ले रही हैं और देश की जनसंख्या पड़ोसी देश से भी ज़्यादा होकर विश्व का सर्वाधिक जनसंख्या वाला देश बन गया है हमारा देश। तो आप Human Birth Control के लिए कब तक और क्या प्रावधान लाएंगे ? या अधिकतम जनसंख्या से ही विश्वगुरु बनने-बनाने का इरादा है आपका ? आएँ ?
कहता .. जज साहिब ! .. जैसे विश्व भर का हर मुसलमान आतंकवादी नहीं होता, परन्तु हर आतंकवादी मुसलमान ही होता है। जैसे हर मांसाहारी इंसान असंवेदनशील नहीं होता, परन्तु असंवेदनशील इंसान ही मांसाहारी होता है। जैसे हर शराबी विवेकहीन नहीं होता, परन्तु विवेकहीन इंसान ही शराबी होता है। ठीक वैसे ही हर कुत्ता काटने वाला नहीं होता, परन्तु हर काटने वाला सजीव प्राणी कुत्ता ही होता है। चाहे वो काटने वाला चौपाया कुत्ता हो या फिर दो पैरों वाले इंसान के शरीर में बलात्कारी कुत्ता या इंसानी भेड़िया हो।
कुत्ते के काटने पर Rabies से बचने के लिए दवा के बाज़ारों में तो Injections उपलब्ध हैं। परन्तु .. एक बलात्कृत बच्ची के Broken Hymen Membrane यानी शीलभंग का क्या इलाज है भला ? जो कि दुर्भाग्यवश तो कतई नहीं .. निःसंदेह दुर्भावनावश इस पुरुष प्रधान समाज में उसकी so called Virginity की so called Criteria भी है।
बलात्कार के समय तो so called भूत-प्रेत से बचाने वाला so called हनुमान चालीसा का पाठ या कुरान की आयतें या कलमा या फिर बाइबल के वचन भी उसकी रक्षा करने में असमर्थ रहते हैं।
.. शायद ...
एक-दो हिंसक कुत्तों के कारण गली के सभी देशी नस्ल के बेसहारा कुत्तों को आवारा नाम देकर उन्हीं हिंसक कुत्तों के साथ एक ही 'शेल्टर (?) होम' में रखे जाने का Supreme Court का फ़ैसला या यूँ कहें कि .. फ़रमान .. ठीक वैसा ही है कि गोया शहर के उन सभी चंद बलात्कारी दरिंदों मर्दों के साथ ही शहर के सभी रोड पर घूमने वाले Gen Z को भी एक ही कारावास में एक साथ बंद कर दिया जाए।
अगर हम सभी अपने-अपने सामर्थ्य के अनुसार आसपास के लावारिस पशु-पक्षियों के पालनहार बन जाएं, तो Shelter Home (?) की नौबत ही नहीं आएगी। पर नहीं ...
ये सब हमारे दोगले समाज .. ओह Sorry .. दोहरी नीति वाले समाज की वज़ह से है। एक तरफ़ तो ये हर शनिवार काले लिबासों में so called शनि मंदिर में LED के युग में भी दिन के उजाले में दीए जलाएंगे और दूसरी तरफ़ उनके so called वाहन को यानी कुत्ते को अपने दरवाज़े से दुत्कारेंगे। और हाँ, कहते हैं कि कुत्ते शनि ही नहीं .. भैरव के भी वाहन हैं। अभी गत 12 नवम्बर को ही अपने देश में कालभैरव अष्टमी भी मनाई गई है हिंदू धर्मावलंबियों द्वारा।
और तो और ... पशुपतिनाथ यानी पशुओं के नाथ यानी शिव के मंदिरों में जाकर लोग पत्थर के बने नंदी के कान में कानाफूसी करेंगे, पर अगर उनके दरवाज़े पर या बाज़ार में सजीव बैल या साँड़ दिख जाए तो मार कर भगाएंगे।
अरे कुछ तो शर्म करो, so called इंसानों !
जागो इंसानों जागो ! .. बस यूँ ही ...

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