Monday, January 5, 2026

'इत्यादि' का इत्यादि ...





क्या ...

राजेश जोशी की कविता 'इत्यादि' का इत्यादि हूँ मैं ?

या फिर ..

गोरों के लिए काले पानी वाली तेज़ाबी आँधी हूँ मैं ?

या ..

आज़ादी के नाम पे हुए उस बँटवारे की बर्बादी हूँ मैं ?

या ..

कर्ज़दार विवश आत्महंता किसान की त्रासदी हूँ मैं ?

या ..

आत्महंता किसान के अनाथ परिवार की आधि हूँ मैं ?


क्या ..

राजेश जोशी की कविता 'इत्यादि' का इत्यादि हूँ मैं ?

या फिर ..

भ्रष्टाचारी का ख़ाकी या सज़ायाफ़्ता की खादी हूँ मैं ?

या ..

बढ़ती ज्यामितीय आकार से वतन की आबादी हूँ मैं ?

या ..

विकास की आड़ में कुदरती आपदा की मुनादी हूँ मैं ?

या ..

धर्मनिरपेक्ष होकर भी आरक्षण भोगी जातिवादी हूँ मैं ?


क्या ..

राजेश जोशी की कविता 'इत्यादि' का इत्यादि हूँ मैं ?

या फिर ..

निःसहाय, परवश बलात्कृत की झीनी आपत्ति हूँ मैं ?

या ..

राजा-महाराजों के अंतःपुर या हरम की व्युत्पत्ति हूँ मैं ?

या ..

एक प्रेम-निशानी परन्तु समाज की अवैध संतति हूँ मैं ?

या ..

व्याभिचारी नरों की जननी, कोठेवाली की उपाधि हूँ मैं ?


क्या ..

राजेश जोशी की कविता 'इत्यादि' का इत्यादि हूँ मैं ?

या फिर ..

अंधपरंपराओं को रीति-रिवाज मानने का आदी हूँ मैं ?

या ..

पृथ्वी का वर्तमान भर या पूरे ब्रह्माण्ड का आदि हूँ मैं ?

या ..

हूँ जीवन रेखा से बँधा नश्वर शरीर भर या अनादि हूँ मैं ?

या ..

वीर्य-बूँद से भस्म तक का राही, आज मांस-पिंडी हूँ मैं ?

बिहारी था कभी, राज्य बँट जाने से अब झारखंडी हूँ मैं ?

No comments:

Post a Comment