Friday, September 27, 2019

चन्द पंक्तियाँ - (१८ ) - "मन के दूरबीन से" - बस यूँ ही ...

(१)*

माना ...
इन दिनों
छीन लिया है
तुम्हारे सिरहाने से
मेरी बाँहों का तकिया
मेरे 'फ्रोजेन शोल्डर' ने ...

बहरहाल आओ
मन बहला लो
सुन्दर रंगोली से
जो है सजी
तन पर मेरे
'इन्सुलिन की सुइयों' से ...

(२)*

माना ...
मासूम बच्चों को
अब तक
बहुत बार
दो बूँद पिलाया
पोलियो का

अब क्यों ना ...
सनके सयानों के लिए
प्रयोगशालाओं में
बनाया जाए
"डोपामाइन-
हार्मोन्स" का टीका !?...

(३)*

लाख दूर
रहने पर भी
पल-पल
पास-पास
तुम्हारा ...
रूमानी अहसास
मेरे मन के
दूरबीन से ...

देखो ना जरा ! ...
मैं कहीं
"गैलीलियो" तो नहीं
बन गया !? ...



8 comments:

  1. वाह..शानदार.. बेहद लाज़वाब बिंबों से युक्त खूबसूरत छोटी कविताएँ...।

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    1. शुक्रिया श्वेता जी ...

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  2. इन्सुलिन की सुइयों' के साथ भी एहसासों की रंगोली सजाने की आंकाक्षा | ग़जब का आशावाद सुबोध जी ! कविता के तीनों रंग शानदार हैं |

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  3. शुक्रिया .. हार्दिक आभार रेणु जी ... पर मैं एहसासों की रंगोली की नहीं ... शरीर में इन्सुलिन की सुइयों से रोज-रोज नए छिद्रों से बनने वाली रंगोली की बात कर रहा था वैसे ...

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