(१)
मालूम नहीं .. तुम्हें मैं याद हूँ भी या नहीं ? .. तुम यदि आज पास होती, तो मैं तुम्हें इसी "पल्लवी" नाम से सम्बोधित करता या फिर बड़े लाड से "पुल्लु" बुलाता। है ना ?
(२)
कभी तुम मेरी अध्यापिका बन जाती और कभी मैं तुम्हारा अध्यापक। है ना "पुल्लु" ?
(३)
कर देते तुम शाप यह मेरा अस्वीकार, तो क्या मुझे दुःख होता ?
(४)
अब ये .. तुम्हारे लिए डार्लिंग सम्बोधन .. तुम्हें तो अटपटी नहीं लगती ना ?
है ना "पुल्लु" डार्लिंग ?
(५)
अब तुम ही बोलो .. मैंने कुछ ग़लत कहा था क्या उनको ?
(६)
वैसे .. तुम्हें तो डार्लिंग बोलता, क्रश बोलता, नेशनल क्रश बोलता, हाफ़ नेशनल क्रश बोलता .. तुम तो कतई बुरा नहीं मानती ना ? .. आँ .. बोलो ना ! ..
(७)
है तो दोनों ही उसी पुरुष पिता के अंश, है ना "पुल्लु" ?
(८)
ऐसे में .. पेट और शरीर की भूख को तो तृप्ति मिल ही जाती है, पर आत्मिक और दिमाग़ी भूख नहीं मिट पाती है। उसका क्या ? ..
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